आबादी पर मीडिया का दृष्टिकोण

वरुण शैलेश जनगणना-2011 के मुताबिक भारतीय मुस्लिमों की आबादी पिछले दशकों की तुलना में बहुत धीमी गति से बढ़ी है और इनकी वृद्धि दर हिन्दू आबादी के मुकाबले तेजी से कम हुई है। भारतीय इतिहास के एक दशक में मुस्लिमों की वृद्धि दर में सबसे ज्यादा कमी जनगणना 2011 में है। भारत में पिछले 10 … Continue reading आबादी पर मीडिया का दृष्टिकोण

हिन्दी के पत्रकार और कश्मीर

अनिल चमड़िया/वरुण शैलेश हिन्दी की पत्र-पत्रिकाओं की भारत के शेष हिस्से में कश्मीर के बारे में आम जन मानस के बीच एक तरह की राय बनाने में सर्वाधिक भूमिका मानी जाती है। भारत में भाषा और धर्म को मिलाने की कोशिश ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी आंदोलन के दौरान से ही देखी जा रही है। ब्रिटिश सत्ता … Continue reading हिन्दी के पत्रकार और कश्मीर

संवाद व्यवस्था का नया और भयावह चेहरा

1943 में इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर के कार्यकर्ताओं के बीच डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा "लोकतंत्र समानता का दूसरा नाम है। संसदीय लोकतंत्र ने स्वतंत्रता की चाह का विकास किया लेकिन समानता के प्रति इसने नकारात्मक रुख अपनाया। यह समानता के महत्व को अनुभव करने में असफल रहा और इसने स्वतंत्रता तथा समानता के बीच … Continue reading संवाद व्यवस्था का नया और भयावह चेहरा

जम्मू मीडिया बनाम कश्मीर मीडिया

संजय कुमार सिंह कश्मीर के मीडिया में जम्मू को तरजीह नहीं दी जाती उसी तरह जम्मू के मीडिया में कश्मीर उपेक्षित रहता है, सिवाय किसी आतंकी घटनाक्रम के। यहां तक कि मीडिया का भेदभाव धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग दिखता है। मीडिया हाउस अपने प्रोडक्ट (अखबार) के लिए आबादी के हिसाब से खबरों … Continue reading जम्मू मीडिया बनाम कश्मीर मीडिया

दक्षिण एशिया में शांति के प्रयास और मीडिया

दक्षिण एशिया में शांति को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका विषय पर चंडीगढ़ में 8-12 अप्रैल 2016 को आयोजित सेमिनार में दिया गया भाषण     प्रबोध जमवाल यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत और पाकिस्तान के मीडिया, जिसमें खबरिया चैनल भी शामिल हैं, ने दक्षिण एशियाई देशों में शांति एवं लोकतंत्र की भावना को … Continue reading दक्षिण एशिया में शांति के प्रयास और मीडिया