संवाद व्यवस्था का नया और भयावह चेहरा

1943 में इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर के कार्यकर्ताओं के बीच डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा "लोकतंत्र समानता का दूसरा नाम है। संसदीय लोकतंत्र ने स्वतंत्रता की चाह का विकास किया लेकिन समानता के प्रति इसने नकारात्मक रुख अपनाया। यह समानता के महत्व को अनुभव करने में असफल रहा और इसने स्वतंत्रता तथा समानता के बीच … Continue reading संवाद व्यवस्था का नया और भयावह चेहरा

जम्मू मीडिया बनाम कश्मीर मीडिया

संजय कुमार सिंह कश्मीर के मीडिया में जम्मू को तरजीह नहीं दी जाती उसी तरह जम्मू के मीडिया में कश्मीर उपेक्षित रहता है, सिवाय किसी आतंकी घटनाक्रम के। यहां तक कि मीडिया का भेदभाव धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग दिखता है। मीडिया हाउस अपने प्रोडक्ट (अखबार) के लिए आबादी के हिसाब से खबरों … Continue reading जम्मू मीडिया बनाम कश्मीर मीडिया

दक्षिण एशिया में शांति के प्रयास और मीडिया

दक्षिण एशिया में शांति को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका विषय पर चंडीगढ़ में 8-12 अप्रैल 2016 को आयोजित सेमिनार में दिया गया भाषण     प्रबोध जमवाल यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत और पाकिस्तान के मीडिया, जिसमें खबरिया चैनल भी शामिल हैं, ने दक्षिण एशियाई देशों में शांति एवं लोकतंत्र की भावना को … Continue reading दक्षिण एशिया में शांति के प्रयास और मीडिया

न्यूज चैनल हर घंटे कश्मीर को भारत से दूर ढकेल रहे हैं

शाह फैसल मेरे एक साल के बच्चे के लिए 13 जुलाई 2016 की दोपहर में सोना मुहाल हो गया था। इलाके में कर्फ्यू लगा था और नजदीक की सड़क पर तड़के से ही आजादी के नारों और आंसू गैस के गोलों के धमाकों की भयावह जुगलबंदी चल रही थी। संघर्ष के क्षेत्र में हिंसा से … Continue reading न्यूज चैनल हर घंटे कश्मीर को भारत से दूर ढकेल रहे हैं

इंटरव्यू पत्रकारिता और नरेन्द्र मोदी

  अनिल चमड़िया अभिव्यक्ति की कई विधाओं में पत्रकारिता भी एक है। कहानियों, कविताओं, नाटकों आदि की प्रस्तुति का कोई एक निश्चित ढांचा नहीं है। कहानियां, कविताएं, नाटक कई तरह से प्रस्तुत किए जाते हैं। पत्रकारिता की विधा में भी प्रस्तुति के कई रूप व शैली हैं। समाचार, विश्लेषण, सूचना, टिप्पणी आदि प्रस्तुति के रूप … Continue reading इंटरव्यू पत्रकारिता और नरेन्द्र मोदी