दक्षिण एशिया में शांति के प्रयास और मीडिया

दक्षिण एशिया में शांति को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका विषय पर चंडीगढ़ में 8-12 अप्रैल 2016 को आयोजित सेमिनार में दिया गया भाषण     प्रबोध जमवाल यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत और पाकिस्तान के मीडिया, जिसमें खबरिया चैनल भी शामिल हैं, ने दक्षिण एशियाई देशों में शांति एवं लोकतंत्र की भावना को … Continue reading दक्षिण एशिया में शांति के प्रयास और मीडिया

न्यूज चैनल हर घंटे कश्मीर को भारत से दूर ढकेल रहे हैं

शाह फैसल मेरे एक साल के बच्चे के लिए 13 जुलाई 2016 की दोपहर में सोना मुहाल हो गया था। इलाके में कर्फ्यू लगा था और नजदीक की सड़क पर तड़के से ही आजादी के नारों और आंसू गैस के गोलों के धमाकों की भयावह जुगलबंदी चल रही थी। संघर्ष के क्षेत्र में हिंसा से … Continue reading न्यूज चैनल हर घंटे कश्मीर को भारत से दूर ढकेल रहे हैं

इंटरव्यू पत्रकारिता और नरेन्द्र मोदी

  अनिल चमड़िया अभिव्यक्ति की कई विधाओं में पत्रकारिता भी एक है। कहानियों, कविताओं, नाटकों आदि की प्रस्तुति का कोई एक निश्चित ढांचा नहीं है। कहानियां, कविताएं, नाटक कई तरह से प्रस्तुत किए जाते हैं। पत्रकारिता की विधा में भी प्रस्तुति के कई रूप व शैली हैं। समाचार, विश्लेषण, सूचना, टिप्पणी आदि प्रस्तुति के रूप … Continue reading इंटरव्यू पत्रकारिता और नरेन्द्र मोदी

स्टिंग ऑपरेशन और न्यूज रूम की संस्कृति

मुजफ्फरनगर दंगों के स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा गठित जांच समिति के समक्ष चैनल के संपादकीय व प्रबंधकीय अधिकारियों ने जो साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं उससे टी वी चैनलों के न्यूज रूम के भीतर  के कामकाज की संस्कृति जाहिर होती है। दिनांक 17 सितम्बर 2013 को "आज तक" एवं "हेड लाइन्स … Continue reading स्टिंग ऑपरेशन और न्यूज रूम की संस्कृति

पत्रकारिता का भविष्य: पत्रकारिता संस्थानों में एक सर्वेक्षण

देश में पत्रकारिता के अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण की इस पृष्ठभूमि से जाहिर है कि असमान स्थितियों और कई तरह के अंतर्विरोधों के बीच पत्रकारिता का भविष्य तैयार हो रहा है। पत्रकारिता को व्यवसाय के लिए अध्ययन का क्षेत्र बनाने पर ज्यादा जोर दिखता है न कि लोकतंत्र के लिए भविष्य की पत्रकारिता को एक … Continue reading पत्रकारिता का भविष्य: पत्रकारिता संस्थानों में एक सर्वेक्षण