संवाद व्यवस्था का नया और भयावह चेहरा

1943 में इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर के कार्यकर्ताओं के बीच डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा "लोकतंत्र समानता का दूसरा नाम है। संसदीय लोकतंत्र ने स्वतंत्रता की चाह का विकास किया लेकिन समानता के प्रति इसने नकारात्मक रुख अपनाया। यह समानता के महत्व को अनुभव करने में असफल रहा और इसने स्वतंत्रता तथा समानता के बीच … Continue reading संवाद व्यवस्था का नया और भयावह चेहरा